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Return To Shopतर्क • बुद्धि • विज्ञान • शास्त्र प्रमाण के आधार पर सनातन धर्म को समझें
Confusion नहीं, Clarity चाहिए?
❌ “अंधविश्वास, भ्रम और WhatsApp ज्ञान से परेशान?”
✅ “वेदों, उपनिषद, षड्दर्शन और गीता से हर सनातन प्रश्न का स्पष्ट समाधान”
यह पुस्तक धर्म, कर्म और भारतीय ज्ञान परंपरा को
तर्क और विज्ञान के साथ समझाती है
✔ केवल मान्यता नहीं — तर्क और विवेक
✔ वेद, उपनिषद, षड्दर्शन, गीता + आधुनिक विज्ञान का संतुलन
✔ सरल, स्पष्ट और समझने योग्य हिंदी भाषा
✔ छात्र, अभिभावक, शिक्षक और जिज्ञासु सभी के लिए उपयोगी
👉 सब कुछ Explanation के साथ, आदेश या मान्यता के रूप में नहीं।
अगर आप सनातन धर्म का सही ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं और अपने बच्चों में नैतिकता व संस्कारों का विकास करना चाहते हैं, तो यह विशेष पुस्तक सेट आपके लिए है!
1️⃣ “वैदिक सनातन धर्म (शंका समाधान)” – (Pages – 380)
तर्क, विज्ञान और शास्त्र प्रमाण के आधार पर सनातन धर्म से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर।
क्या सनातन धर्म विज्ञान-सम्मत है?
क्या वेद और शास्त्र आज भी प्रासंगिक हैं?
मूर्ति पूजा, कर्मकांड और अन्य विषयों पर तर्कपूर्ण समाधान।
2️⃣ “नैतिक शिक्षा” – (Pages – 272)
बच्चों और युवाओं में नैतिकता, संस्कार और जीवन मूल्यों को विकसित करने वाली पुस्तक।
रामायण, महाभारत और उपनिषदों से प्रेरित शिक्षाएं।
आदर्श जीवन जीने के सिद्धांत।
चरित्र निर्माण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना।
✅ लेखक – आचार्य दीपक (वैदिक विद्वान) ✅ Book Format – Hard Copy ✅ Language – हिंदी
📦 सीमित स्टॉक – आज ही ऑर्डर करें!
🚚 COD उपलब्ध | Free Shipping
📥 अभी ऑर्डर करें और अपने जीवन में वैदिक ज्ञान का प्रकाश फैलाएं !
✅ 3 Must-Read Books – विशेष रूप से चुनी गईं
✅ शास्त्र प्रमाण + तर्क + विज्ञान आधारित समाधान
✅ सरल हिंदी भाषा में लिखी गईं
✅ Hard Copy Books – आजीवन सुरक्षित रखने योग्य
✅ Free Delivery + COD सुविधा
"वैदिक गीता - गीता का शुद्ध वैदिक स्वरूप" Book में प्रामाणिक श्लोकों के साथ गीता का मूल वैदिक अर्थ प्रस्तुत किया गया है। यह संस्करण आधुनिक भ्रांतियों से मुक्त, वैदिक एवं शास्त्रसम्मत व्याख्या प्रदान करता है।
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📝 Instant Access
🔑 Lifetime Validity
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✅ शास्त्र प्रमाण + तर्क + विज्ञान आधारित समाधान
✅ सरल हिंदी भाषा में लिखी गईं
✅ Hard Copy Books – आजीवन सुरक्षित रखने योग्य
✅ Free Delivery + COD सुविधा
भारतीय संस्कृति और वैदिक वाङ्मय से जुड़े हर व्यक्ति के लिए छः दर्शन या षड्दर्शन अत्यन्त महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ये सभी दर्शन वेदों को प्रमाण मानते हैं, इसलिए इन्हें वैदिक दर्शन भी कहा जाता है।
ये छः प्रमुख दर्शन हैं— न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदान्त।
इन छः दर्शनों का आशय उन सूत्र-ग्रन्थों से है जिन्हें महर्षियों ने अपने गहन तप, अनुभव और ज्ञान के आधार पर रचा—
न्याय सूत्र — महर्षि गौतम
वैशेषिक सूत्र — महर्षि कणाद
सांख्य सूत्र — महर्षि कपिल
योग सूत्र — महर्षि पतंजलि
मीमांसा सूत्र — महर्षि जैमिनि
वेदान्त/ब्रह्मसूत्र — महर्षि व्यास
कालान्तर में इन सूत्र-ग्रन्थों पर अनेकों विद्वानों ने भाष्य, टीकाएँ और विस्तृत व्याख्याएँ लिखीं; फिर भी एक ऐसा भाष्य अपेक्षित था जो दर्शन के गूढ़ रहस्यों को सरल, सुबोध, और विवेचनात्मक शैली में प्रस्तुत कर सके।
ऐसी ही आवश्यकता को पूर्ण करते हैं— आचार्यप्रवर पं. उदयवीर शास्त्री।
आचार्यजी दर्शनों के मर्म को भली-भाँति जानने वाले, गहन चिन्तनशील और विषय-तत्व के सिद्धहस्त विद्वान थे। उनके द्वारा रचित विद्योदय भाष्य छः दर्शनों पर किए गए दीर्घकालीन मनन, चिन्तन और साधना का अमूल्य परिणाम है।
इन भाष्यों में—
सूत्रों के शब्दों का सन्दर्भानुसार सही अर्थ निकालकर,
सिद्धान्त एवं अनुप्रयोग—दोनों पक्षों का सुंदर समन्वय करके,
दर्शन के कठिन विषयों को भी आसानी और स्पष्टता के साथ समझाया गया है।
इस कारण ये भाष्य न केवल शास्त्र-विहित और परम्परानुकूल हैं, बल्कि विज्ञानसम्मत और तार्किक भी हैं। इनके अध्ययन से अनेक सूत्रों के अर्थ खुलकर सामने आते हैं, और दर्शन जैसा गंभीर विषय भी साधारण जिज्ञासु के लिए सरल हो जाता है।
वेद सनातन धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथ हैं, जिन्हें *"श्रुति"* (ईश्वर-प्रदत्त ज्ञान) कहा जाता है। ये संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं और सनातन धर्म के आध्यात्मिक, दार्शनिक और व्यावहारिक ज्ञान का आधार माने जाते हैं।वेदों को पढ़ने का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्के वैज्ञानिक, दार्शनिक और व्यावहारिक जीवन की दृष्टि से भी अत्यधिक है। यहाँ कुछ प्रमुख कारण दिए गए हैं जो बताते हैं कि *हमें वेद क्यों पढ़ना चाहिए।
महर्षि दयानंद सरस्वती (1824-1883) एक क्रांतिकारी विचारक, समाज सुधारक और आर्य समाज के संस्थापक थे, जिन्होंने भारतीय समाज को वैदिक मूल्यों की ओर लौटने का संदेश दिया। उनका मुख्य संदेश निम्नलिखित था।
"वेदों की ओर लौटो" (Back to Vedas)- उन्होंने वेदों को सत्य और ज्ञान का सर्वोच्च स्रोत माना और भारतीयों से आग्रह किया कि वे मनगढ़ंत मान्यताओं को छोड़कर वैदिक शिक्षाओं को अपनाएं । उनका मानना था कि वेद सभी सत्य विद्याओं का भंडार हैं और इनमें विज्ञान, नैतिकता और आध्यात्मिकता का समन्वय है ।
*तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण*
- उन्होंने एक ऐसे धर्म की कल्पना की जो सभी मनुष्यों के लिए समान हो और जिसमें कोई भेदभाव न हो । - उनका मानना था कि धर्म किसी एक पंथ या संप्रदाय तक सीमित नहीं होना चाहिए ।
वेदों का महत्व:*सनातन ज्ञान का स्रोत* – वेदों को ईश्वरीय ज्ञान माना जाता है, जो ऋषियों को साक्षात्कार (सुनने) के माध्यम से प्राप्त हुआ।
ऋग्वेद — महर्षि दयानन्द तथा अन्य वैदिक विद्वानों द्वारा
यजुर्वेद — महर्षि दयानन्द
सामवेद — पं. रामनाथ वेदालंकार
अथर्ववेद — पं. क्षेमकरणदास त्रिवेदी
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